'संजय दत्‍त रोक सकते थे 1993 का मुंबई अटैक', कौन हैं उज्‍जवल निकम? बॉलीवुड एक्‍टर को लेकर किया बड़ा दावा

1993 Mumbai blasts and Sanjay Dutt: 12 मार्च 1993 की दोपहर मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के जख्‍म आज भी मृतकों के परिजनों की आंखे नम कर देते हैं। अबू सलेम और टाइगर मेमन ने मुंबई की प्रमुख इमारतों समेत कुल 12 जगहों पर आरडीएक्स (RDX) से लदे वाहनों से धमाके करवाए। जिसमें 277 बेगुनाह लोग मारे गए और लगभग 1400 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।

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वहीं इस योजनाबद्ध तरीके से हुए आतंकी हमले को लेकर वरिष्‍ठ वकील और भाजपा सांसद ने एक्‍टर संजय दत्‍त को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्‍होंने दावा किया है कि अगर संजय दत्‍त चाहते तो मुंबई अटैक को रोक सकते थे।

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दरअसल, ये बड़ा दावा 1993 मुंबई हमले केस के वरिष्‍ठ वकील उज्‍जवल निकम ने किया है। उज्‍जवल निकम इन दिनों नाना पाटेकर के द्वारा निर्देशित अपकमिंग फिल्‍म 'प्रहार: द फाइनल अटैक' के कारण चर्चा में हैं। इस फिल्‍म में उज्‍जवल निकम का किरदार एक्‍टर राजकुमार राव निभ रहे हैं। आइए जानते हैं कौन है उज्‍जवल निकम और उन्‍होंने एक्‍टर संजय दत्‍त को लेकर क्‍यों ये दावा किया ?

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'संजत दत्‍त रोक सकते थे मुंबई हमला!'

दरअसल, उज्वजल निकम ने द लल्‍लनटॉप को दिए इंटरव्‍यू में 1993 में हुए बम धमाकों में संजय दत्‍त की भूमिका को लेकर बड़ा ही हैरान करने वाला दावा किया है। एंकर ने सवाल किया क्‍या संजय दत्‍त 1993 के बम धमाकों को रोक सकते थे? इस पर उन्‍होंने कहा अगर संजय दत्‍त ने सही समय पर समझदारी दिखाई होती तो मुंबई में 1993 में हुए दिल दहला देने वाले आतंकी धमाकों को होने से पहले ही रोका जा सकता था और 277 बेगुनाह लोगों की जान बच जाती।

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संजय दत्‍त कैसे रोक सकते थे 1993 का मुंबई हमला ?

उज्‍जवल निकम ने बताया मुंबई में हुए धमाकों से पहेले डी कंपनी का मालिक अबू सलेन टेम्‍पो भरकर बड़ी संख्‍या में खतरनाक असलहें लेकर आया था। जिसमें हैंड ग्रेनेड और एके 47 राइफल्‍स भी थे। निकम ने दावा किया कि संजय दत्‍त ने कुछ हथियार को अपने पास रख लिए थे।

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संजय दत्‍त को तुरंत पुलिस को जानकारी देनी चाहिए थी

उज्‍जवल निकम ने कहा कि मेरा ये मानना है कि जैसे ही संजय दत्‍त को इन हथियारों के बारे में पता चला था तभी उन्‍हें पुलिस को जानकारी देनी चाहिए थी। उन्‍होंने कहा तब पूरा खेल कुछ और ही होता पुलिस एक्‍शन लेती और इतनी भयावह आतंकी साजिश रोक दी जाती और इस घटना को अंजाम देने की प्‍लानिंग कर रहे अपराधी पहले ही सलाखों के पीछे पहुंच जाते। निकम ने कहा मैंने इस केस में इसलिए संजय दत्‍त को दोषी ठहराया क्‍योंकि उनके पास मौका था लेकिन उन्‍होंने समय पर पुलिस को सूचित नहीं किया। अगर वो सूचित कर देते तो इतनी बड़ी तबाही ना मचती।

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'संजय दत्‍त कोई आतंकी नहीं हैं'

उज्‍जवल निकम ने अपने इंटरव्‍यू में हालांकि ये साफ कहा कि संजय दत्‍त कोई आतंकवादी नहीं है, उनका इरादा कोई आतंकी हमला करवाना नहीं था लेकिन उन्‍हें असल में वेपनरी का शौक था। इसी शौक के चलते उन्‍होंने अपने पास ये हथियार रख लिए जिसके कारण उन्‍हें लंबी जेल भुगतनी पड़ी।

कौन हैं उज्‍जवल निकम?

उज्ज्वल निकम प्रतिष्ठित सीनियर एडवोकेट हैं और भाजपा से राज्‍यसभा सांसद भी हैं। मार्च 1953 में महाराष्ट्र के जलगांव में जन्‍में उज्‍जवल निकम के पिता देवरावजी निकम बैरिस्टर और जज रह चुके हैं। उज्‍ववल वो ही पब्लिक प्रॉसिक्यूटर यानी सरकारी वकील हैं जिन्‍होंने मुंबई धमाकाें के अलावा 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मामले में पकड़े गए आतंकवादी अजमल कसाव को फांसी की सजा दिलवाई थी। इसके अलावा गुलशन कुमार हत्‍या केस, प्रमोद महाजन हत्‍या केस, 2013 का मुंबई बलात्‍कार केस और 2016 के कोपार्डी बलात्‍कार और हत्‍या केस में सरकारी वकील रह चुके हैं। अपने तीन दशक के करियर में 600 से अधिक केस में अजीवन कारावास और 37 मामलों में मृत्‍युदंड की सजा दिलवा चुके हैं।